वो औरत है.....
Poem

वो औरत है…..

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वो औरत है…..

एक औरत जिंदगी का हर किरदार,

बखूबी निभाती है|

हर काम में वो अपनी,

दिलोजान लगाती है|

ना गिलाना शिकवा,

अपनी जुबां पर लाती है|

हर रिश्ते को प्यार से,

सींचती चली जाती है|

जब कभी आदमी की बारी

साथ निभाने की आती है|

न जाने उसे,

थकान क्यों हो जाती है|

आज तुम कर लो,

मैं कल से कर दूंगा|

ये कह कर वह,

दर किनार हो जाता है|

औरत सिर्फ मुस्कुराकर,

अपने काम में लग जाती है|

सवालो के भॅवर में फंस कर भी,

अपना फर्ज निभाती है|

अपना हर काम,

दिल से करती जाती है|

थकी हो या दुःखी हो,

बाद में करती हूँ ये जुबा पे नहीं लाती है|

वो औरत है,

जो हर रूप में समा जाती है|

हर किरदार को

बखूबी निभाती है|

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