माँ
Poem

माँ…

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माँ, तुमने था सपना देखा, पर अधूरा छोड़ दिया,

जीवन के हर मोड़ पर तुमने, खुद को कही पर छोड़ दिया

सब को खुश करने को तुमने, अपना अस्तित्व ही तोड़ दिया,

चलो चले उन सपनो में, जिनको तुमने छोड़ दिया

जब से समझा मैंने तुमको, बस यही देखा है,

सबके सुख में तुम खुश हो, सबका दुःख अपना है

अपनी आशाओ को कभी, कोई तो उड़ान दो,

माँ, अपने जीवन को तुम, कोई तो मुकाम दो ।

हमारा जीवन बनाने में अपना ही नाम खो दिया,

तुम माँ हो, पर खुद को कोई तो नाम दो |

चलो चले फिर जी लेते हैं तुम्हारे ही सपनो में,

मैं ऐसा कुछ कर सकू, मुझे ऐसा वरदान दो ।

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