प्राणायाम क्या है
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प्राणायाम क्या है

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वर्तमान महामारी कोरोना वायरस ने एक बार फिर मनुष्य को ये बता दिया कि प्रकृति से ऊपर कोई नहीं है और मनुष्य के लिए उसका पहला सुख उसकी निरोगी काया है। अब प्रत्येक व्यक्ति अपने शारीरिक और मानसिक शक्ति के प्रति सचेत है और उसे बढ़ाने के लिए अब वो सारी क्रियाप्रक्रिया अपनी दिनचर्या में कर रहा है जिससे कि वो स्वस्थ रहे। इसमें अनुशासन, संयम, व्यायाम, और आहार है। आज पूरे विश्व ने योग के महत्व को भी जाना है और पूरे विश्व ने भारत के योगदान को बहुत सराहा भी है। योग ने ये भी सिद्ध कर दिया कि इस कोरोना काल महामारी में प्राणायाम में इससे लड़ने की ताकत है। आइये, यहाँ हम प्राणायाम के बारे में जानते है।

प्राणायाम क्या है?

प्राणायाम योग का एक अभिन्न अंग है और यह योग के आठ अंगों में से चौथा अंग है। प्राणायाम एक श्वास व्यायाम है जिसमे हमारी सांस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है – प्राण+आयाम। प्राण वह शक्ति है जो हमारे शरीर को ज़िंदा रखती है और हमारे मन को शक्ति देती है अर्थात “प्राण” का अर्थ हमारी साँस से है जो कि हमारी जीवन शक्ति है और दूसरा शब्द आयामजिसका अर्थ नियंत्रण”( विस्तार) है। प्राणायाम एक पूरा श्वास व्यायाम है जिससे कि ऊर्जा को नियंत्रित किया जा सकता है और स्वस्थ शरीर को प्राप्त किया जा सकता है। हम जब साँस लेते हैं तो भीतर जा रही ऑक्सीजन पाँच भागों में विभक्त हो जाती है या कहें कि वह शरीर के भीतर पाँच जगह स्थिर हो जाता हैं। ये पंचक निम्न हैं- (1)व्यान, (2)समान, (3)अपान, (4)उदान और (5)प्राण। यदि इनमे से एक भी जगह दिक्कत है इस से शरीर, मन तथा चेतना को भी परेशानी हो सकती है।

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प्राणायाम मुख्य रूप से तीन चरणों में आधारित या विभाजित होता है – 1. पूरक(साँस लेना) 2. कुम्भक (साँस रोकना) 3. रेचक (साँस छोड़ना)

(1)पूरक:- नियंत्रित गति से श्वास अंदर लेने की क्रिया को पूरक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब भीतर खिंचते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

(2)कुम्भक:- अंदर की हुई श्वास को क्षमतानुसार रोककर रखने की क्रिया को कुम्भक कहते हैं। श्वास को अंदर रोकने की क्रिया को आंतरिक कुंभक और श्वास को बाहर छोड़कर पुन: नहीं लेकर कुछ देर रुकने की क्रिया को बाहरी कुंभक कहते हैं। इसमें भी लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

(3)रेचक:- अंदर ली हुई श्वास को नियंत्रित गति से छोड़ने की क्रिया को रेचक कहते हैं। श्वास धीरे-धीरे या तेजी से दोनों ही तरीके से जब छोड़ते हैं तो उसमें लय और अनुपात का होना आवश्यक है।

प्राणायाम के प्रकार:

  1. भस्त्रिका प्राणायाम
  2. भ्रामरी प्राणायाम
  3. उद्गीथ प्राणायाम
  4. शीतली प्राणायाम
  5. शीतकारी प्राणायाम
  6. उज्जायी प्राणायाम
  7. अनुलोम-विलोम प्राणायाम
  8. कपालभाति प्राणायाम
  9. नाड़ीशोधन प्राणायाम
  10. सूर्यभेदी प्राणायाम
  11. बाह्य प्राणायाम

प्राणायाम के नियम: –

जैसा कि बताया गया है कि प्राणायाम एक श्वास व्यायाम है जो कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।  यदि प्राणायाम को नियम से अनुशासित और नियमित रूप से करें तो इससे आप अनेक लाभों को प्राप्त कर सकते हैं । प्राणायाम के कुछ नियम इस प्रकार है : –

  1. समय: –  प्राणायाम करने का सबसे उत्तम समय सुबह का है। सुबह के समय आप स्वच्छ हवा का सेवन एक शांत वातावरण में कर सकते हैं। सुबह की ताजी हवा और ऊर्जा दिमाग और शरीर मे भर जाती है।
  2. स्थान: – पर्याप्त हवा, प्रकाश के साथ स्थान शोर मुक्त और विशाल होना चाहिए। यदि एक बंद कमरे में करे, तो खिड़कियों को खुला रखे।
  3. आसन: – फर्श पर एक चटाई पर बैठें, रीढ़ (पीठ) को सीधा और सामने की तरफ देखे  । घुटने की समस्या वाले लोगों के लिए और जो फर्श पर नहीं बैठ सकते वहे एक कुर्सी का उपयोग करे।

प्राणायाम करने के फायदे: –

  • प्राणायाम में गहरी साँस लेने से शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति अच्छे से होती है।
  • प्राणायाम रुकी हुई नाड़िया और चक्रों को खोल देता है।
  • प्राणायाम आपके पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है।
  • प्राणायाम हमारा हृदय और फेफड़ों को सशक्त बनाने के लिये लाभदायक है।
  • प्राणायाम चिंता और तनाव को दूर करने में मदद करता है।
  • प्राणायाम से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • प्राणायाम से याददाश्त बढ़ती है।
  • प्राणायाम से शरीर, मन, और आत्मा में तालमेल बनता है।
  • प्राणायाम से केश सम्बन्धी समस्याओँ और चेहरे की झुरियाँ का समाधान होता है।
  • प्राणायाम से सर्दी, खाँसी, नाक, और गला ठीक हो जाता है।
  • प्राणायाम कोलेस्ट्रोल को घटाने में भी सहायक है।
  • प्राणायाम करने से कब्ज, एसिडिटी, और पेट सम्बन्धी समस्याऐं मिट जाती हैं।

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