पिता Father
Poem

पिता

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पिता शब्द का अर्थ ना पूछो,

मैं बता ना पाऊंगा |

इतना विस्तृत अर्थ है इसका,

मैं समझा ना पाऊंगा ||

जीवन का आधार इन्ही से,

जीवन का विस्तार इन्ही से |

हर सुकून, हर चैन इन्ही से

हर उम्मीद इन्ही से है ||

पर्वत जैसी शान है ऊँची

आसमान सा विस्तृत मन |

हर कदम पर नजर है रखते

भटक ना जाए मेरे कदम ||

प्यार इनका ताकत है मेरी

विश्वास इनका हिम्मत है मेरी |

चलता रहू इनके चिन्हो पर

बस यही इक आस है मेरी ||

प्यार इन्ही का पाकर हूँ जीता

बिन इनके ये क्या जीवन |

कर्ज आपका है मुझ पर

दिया आपने ये जीवन ||

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