चूड़ियाँ
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चूड़ियाँ

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राधिका चाय का कप लेकर बालकनी में गयी ही थी कि नीचे से आती एक आवाज ने उसका ध्यान अपनी और खींचा | राधिका ने ध्यान से देखा तो वो मीना ही थी | उसे देख कर राधिका बहुत खुश हुई | कुछ महीनो पहले मीना का पति राधिका की कॉलोनी में चूड़ियाँ बेचने आया करता था | कॉलोनी की सारी औरते उससे चूड़ियाँ लिया करती थी | वो भी सभी को दीदी कहता था और बड़े ही सम्मान के साथ बात करता था | राधिका उससे उसके बच्चो की पढ़ाई के बारे में पूछती थी, तो वो बहुत खुश होकर अपने बच्चो के बारे में बताता था | वो कहता, दीदी मेरे बच्चे दुनिया के सबसे अच्छे बच्चे है,  पढ़ने में बहुत तेज है, कभी मुझसे जिद नहीं करते, जो देता हूँ ले लेते है | बोलते बोलते उसकी आँखे भर आती थी | वो अपने बच्चो के लिए बहुत कुछ करना चाहता था | हमेशा कहता था कि मैं अपने बच्चो को बहुत पढ़ाऊंगा, अच्छा इंसान बनाऊंगा | काफी दिनों तक उसका पति चूड़ियाँ बेचने नहीं आया | कुछ लोगो से पता किया तो पता चला की वो बहुत बीमार है | राधिका खुद को रोक नहीं सकी और उसके परिवार से मिलने चली गयी | वहाँ जाकर उसे पता चला कि एक दिन पहले ही वो अपनी बीमारी से लड़ता हुआ इस दुनिया से चला गया | राधिका को कुछ समझ नहीं रहा था, वो क्या करे और किससे क्या कहेवो किसी से मिले बिना ही अपने घर गयी | घर आने के बाद उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था | रह रह कर राधिका को वो बच्चे याद रहे थे जिनके आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे और वो बीबी जो पत्थर सी हो गयी थी | ……बहुत सोचने के बाद राधिका ने एक बार फिर उस परिवार से मिलने जाने का निर्णय लिया | कुछ दिनों बाद वो उनसे मिलने उनके घर गई और यह देखकर बहुत हैरान रह गयी कि वो बच्चे और उसकी बीबी सब उसको पहचानते थे | बच्चे बोले, बाबा आपके बारे में बताते थे, आप हमारी पढ़ाई का ध्यान रखती थी नाबाबा को अच्छा लगता था, बाबा हमे खूब पढ़ाना चाहते थे, ये कहते कहते बच्चे रोने लगे | माँ भी बच्चो को रोता देख रोने लगी | रोते हुऐ कहने लगी कि मैं हूँ ना, हम सब मिलकर तुम्हारे बाबा की इच्छा पूरी करेंगे | राधिका ने पूछा, तुम क्या करोगी | तुम मेरे ऑफिस में जाना, मैं तुम्हे कोई नौकरी दिलवा दूंगी | मीना ने हाथ जोड़कर राधिका को धन्यवाद दिया और बोली में नौकरी नहीं करुँगी, मैं इनके बाबा का चूडियो का ही काम करुँगी | इनके बाबा भले ही चले गए हो लेकिन इस काम में वो मेरे साथ जरूर रहेंगे | उसकी बाते सुन कर राधिका की आँखे भर आयी | आज जब मीना कॉलोनी में चूड़ियाँ बेचने आयी तो राधिका को बहुत ख़ुशी हुई|

बात मानने वाली है किचाहो तो किसी चीज को अपनी कमजोरी बना या फिर अपनी ताकत | मीना के हाथो में चूड़ियाँ भले ना रही हो, पर मन में उसकी चूड़ियों की खनक को उसने जिन्दा रखा था |

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